रिपोर्ट- शम्भू प्रसाद
ऊखीमठ (रुद्रप्रयाग)।
अनुसूचित जाति-जनजाति शिक्षक एसोसिएशन उत्तराखंड के प्रांतीय नेतृत्व के निर्देशन में आज प्रदेश की समस्त तहसीलों में उपजिलाधिकारियों के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड को 19 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। ऊखीमठ ब्लाक से ब्लाक अध्यक्ष उमेद बैरवाण, महामंत्री चन्द्रपाल शाह एवं कोषाध्यक्ष मोहन आर्य के नेतृत्व में शिक्षक साथी पवन भेतवाल, अजय फेगवाल, श्यामलाल आर्य, राजेन्द्र शाह सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।
संगठन द्वारा प्रदेश के विभिन्न जनपदों, ब्लाकों एवं मंडलों में कार्यरत शिक्षक कर्मचारियों, विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ व्यापक संवाद-विमर्श के उपरांत शिक्षा, सामाजिक न्याय, संवैधानिक प्रतिनिधित्व, छात्र कल्याण, सेवा सुरक्षा एवं समान अवसर से जुड़े 19 सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया गया।
SC-ST विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति राशि में वृद्धि, पात्रता नियमों में व्यावहारिक शिथिलता और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु कोचिंग, छात्रावास एवं डिजिटल सहायता योजनाओं को सुदृढ़ किया जाए।
लंबित पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जाए तथा आरक्षण संबंधी संवैधानिक प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित हो। आरक्षण रोस्टर प्रणाली का कड़ाई से पालन करते हुए विभागवार बैकलॉग रिक्तियों की पूर्ति हेतु विशेष भर्ती अभियान चलाया जाए। संविदा, उपनल एवं आउटसोर्सिंग सेवाओं में भी नियमानुसार आरक्षण व्यवस्था लागू हो।
सभी पात्र शिक्षक कर्मचारियों हेतु पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाए। अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के वेतन भुगतान हेतु स्थायी, पारदर्शी एवं समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। वर्ष 2011 से पूर्व के शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट के 01 सितंबर 2025 के निर्णयानुसार TET से मुक्ति एवं पदोन्नति सुनिश्चित की जाए।
गोल्डन कार्ड योजना के अंतर्गत OPD सहित प्रभावी एवं कैशलेस स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाएं। स्वच्छता कर्मचारियों की ठेका प्रथा समाप्त कर स्थायी नियुक्ति एवं स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित हो।
इरशाद हुसैन आयोग की रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक कर संस्तुतियों पर समयबद्ध कार्यवाही हो। इंदुकुमार पाण्डेय समिति की अनुशंसाओं पर भी प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। विभागवार SC/ST प्रतिनिधित्व, रोस्टर एवं बैकलॉग रिक्तियों का डेटा सार्वजनिक किया जाए। नीति निर्धारण, आयोग एवं समितियों की बैठकों में SC/ST शिक्षक संगठनों का प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।
शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में अनावश्यक रूप से न लगाया जाए और उन्हें मुख्यतः शैक्षणिक कार्यों तक ही सीमित रखा जाए।
संगठन ने स्पष्ट किया कि ये मांगें केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं हैं बल्कि सामाजिक न्याय, संवैधानिक समानता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं कमजोर वर्गों के अधिकारों से सीधे जुड़ी हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर यथाशीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण माध्यमों से चरणबद्ध जनजागरण एवं आंदोलनात्मक कार्यक्रम चलाने हेतु संगठन बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
