


10 नवंबर को गंगोत्री, 11 नवंबर को यमुनोत्री और केदारनाथ धाम में शीतकाल के लिए दर्शन होंगे बंद; पंचकेदार के मंदिरों के कपाट बंद होने की तिथियां भी तय
देहरादून। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है। शीतकाल के आगमन के साथ ही चारों धामों के कपाट निर्धारित तिथियों पर श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इस वर्ष गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर, जबकि यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे। वहीं, बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर 2026 को रात्रि 9 बजकर 37 मिनट पर बंद किए जाएंगे। इसके साथ ही चारों धामों में इस वर्ष की नियमित यात्रा का समापन हो जाएगा।


कपाट बंद होने के बाद चारों धामों की उत्सव डोलियां पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ अपने-अपने शीतकालीन प्रवास स्थलों के लिए रवाना होंगी। शीतकाल के दौरान श्रद्धालु इन निर्धारित स्थलों पर पहुंचकर भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
10 नवंबर को बंद होंगे गंगोत्री धाम के कपाट
विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को अन्नकूट पर्व पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद दोपहर 12 बजकर 5 मिनट पर बंद किए जाएंगे। इसके बाद मां गंगा की उत्सव डोली मुखबा गांव के लिए रवाना होगी। डोली चंडी मंदिर में रात्रि विश्राम करेगी और 11 नवंबर को भैयादूज के अवसर पर मुखबा पहुंचेगी। शीतकाल के दौरान श्रद्धालु मुखबा स्थित मां गंगा के मंदिर में दर्शन कर सकेंगे।

भैयादूज पर बंद होंगे यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट
मां यमुना के धाम यमुनोत्री के कपाट 11 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 28 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके बाद मां यमुना की उत्सव डोली पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ खरसाली स्थित शीतकालीन प्रवास स्थल के लिए रवाना होगी। सर्दियों में श्रद्धालु खरसाली स्थित मां यमुना मंदिर में पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
वहीं, बाबा केदारनाथ धाम के कपाट भी भैयादूज के पावन पर्व पर 11 नवंबर को सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर बंद होंगे। कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली पारंपरिक मार्ग से रवाना होकर फाटा और गुप्तकाशी होते हुए ऊखीमठ स्थित शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी। यहां शीतकाल के दौरान बाबा केदार की पूजा-अर्चना संपन्न होगी और श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।


16 नवंबर को बंद होंगे बदरीनाथ धाम के कपाट
भगवान बदरीविशाल के कपाट 16 नवंबर 2026 को रात्रि 9 बजकर 37 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। कपाट बंद होने के साथ ही बदरीनाथ धाम में इस वर्ष की यात्रा संपन्न हो जाएगी। इसके बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतकालीन पूजा-अर्चना निर्धारित पूजा स्थल पर जारी रहेगी और श्रद्धालु शीतकाल में भी भगवान बदरीविशाल के दर्शन कर सकेंगे।
6 नवंबर को बंद होंगे तुंगनाथ, 16 नवंबर को मदमहेश्वर के कपाट
चारधाम यात्रा के साथ पंचकेदार के प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद होने की तिथियां भी निर्धारित हैं। तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ मंदिर के कपाट 6 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे। इसके बाद 8 नवंबर को भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली मक्कूमठ पहुंचेगी, जहां शीतकाल में श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।
द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर धाम के कपाट 16 नवंबर को बंद होंगे। इसके बाद भगवान की उत्सव डोली गौंडार में रात्रि विश्राम करेगी। 17 नवंबर को डोली गौंडार से रांसी, 18 नवंबर को रांसी से गिरिया और 19 नवंबर को गिरिया से ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी। यहां भगवान मदमहेश्वर की शीतकालीन पूजा-अर्चना संपन्न होगी।
60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए चारधाम के दर्शन
इस वर्ष उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या देखने को मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चारों धामों में अब तक 60 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इनमें बदरीनाथ धाम में करीब 21 लाख और केदारनाथ धाम में लगभग 18 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। लगभग चार लाख श्रद्धालु हेमकुंड साहिब में भी मत्था टेक चुके हैं।
चारों धामों के कपाट बंद होने के साथ ही वर्ष 2026 की नियमित चारधाम यात्रा का समापन हो जाएगा। हालांकि, शीतकालीन प्रवास स्थलों पर धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना जारी रहेगी और श्रद्धालु इन स्थलों पर पहुंचकर अपने आराध्य के दर्शन कर सकेंगे।
