रिपोर्ट- शम्भू प्रसाद
उखीमठ (रुद्रप्रयाग): प्रधान संगठन उखीमठ ने प्रदेश सरकार पर उनकी 10 सूत्रीय जायज मांगों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है. संगठन के अध्यक्ष श्री त्रिलोक सिंह रावत ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर संगठन ने चार महीने पहले प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री को संबोधित एक मांग पत्र भी सौंपा था. इस मांग पत्र में उत्तराखंड प्रदेश के विकास और प्रधानों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल थे, जैसे:
* मानदेय में वृद्धि: ग्राम प्रधानों के लिए न्यूनतम ₹20,000 प्रति माह मानदेय और वार्ड सदस्यों के लिए प्रति बैठक मानदेय का प्रावधान.
* मनरेगा में ऑफलाइन हाजिरी: उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और नेटवर्क की समस्या को देखते हुए मनरेगा और अन्य योजनाओं में श्रमिकों की हाजिरी पूरी तरह ऑफलाइन करने की मांग, ताकि श्रमिकों को समय पर भुगतान मिल सके और पलायन रुके. इसके साथ ही अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी ₹600 और कुशल श्रमिकों की ₹800 प्रतिदिन करने की भी मांग की गई है.
* बजट में बढ़ोत्तरी: ग्राम पंचायतों को मिलने वाली राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त की धनराशि जनसंख्या और क्षेत्रफल के आधार पर बढ़ाई जाए.
* जिला योजना में भागीदारी: जिला योजना मद से पास होने वाले प्रस्तावों को ग्राम पंचायतों की खुली बैठक में अनिवार्य रूप से पारित कराया जाए और जिला योजना की बैठक में प्रधान संगठन को भी आमंत्रित किया जाए.
* अधिकारों का हस्तांतरण: पंचायती राज एक्ट में पारित सभी 29 विभागों को अतिशीघ्र ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया जाए.
* विधायक/सांसद निधि की तर्ज पर बजट: ग्राम प्रधानों को भी विधायक या सांसद निधि की तर्ज पर आकस्मिक आपदा और आवश्यक कार्यों के लिए बजट उपलब्ध कराया जाए.
* कार्यदायी संस्था का अधिकार: ग्राम पंचायतों में ₹10 लाख तक के कार्यों की कार्यदायी संस्था ग्राम पंचायत को ही बनाया जाए, जिससे स्थानीय रोजगार बढ़े और पलायन रुके.
* स्वास्थ्य और जीवन बीमा: ग्राम प्रधानों और उनके परिवारों के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा स्वास्थ्य और जीवन बीमा का प्रावधान किया जाए.
* आवास प्लस सर्वे में विसंगति: उत्तराखंड के कई ग्राम प्रधानों के नाम आवास प्लस सर्वे 2024 की सूची में होने के बावजूद, आवास सॉफ्ट द्वारा जनरेट की गई प्राथमिकता सूची में नहीं आए हैं. इस विसंगति को जल्द से जल्द दूर कर पात्र परिवारों के नाम शामिल करने की मांग की गई है.
* 16वें वित्त के टैक्स प्रावधानों में संशोधन: 16वें वित्त के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार ग्राम पंचायतों पर टैक्स लगाने की बाध्यता को खत्म किया जाए.
प्रधान संगठन का कहना है कि सरकार द्वारा उनकी इन जायज मांगों को लगातार अनसुना किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के समस्त प्रधानों में सरकार के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है.
बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद मांगों का कोई निराकरण न होने के विरोध में, प्रदेश प्रधान संगठन उत्तराखंड के आह्वान पर, ब्लॉक प्रधान संगठन उखीमठ ने कल, 16 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे से ब्लॉक मुख्यालय पर एकदिवसीय सांकेतिक तालाबंदी और प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है.
संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन को और उग्र करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी.
