


रिपोर्ट- अश्वनी कुमार
देहरादून: उत्तराखंड में भारी बारिश से चारधाम यात्रा प्रभावित, सड़कें खराब और भूस्खलन की समस्या. यात्रियों की संख्या कम, पर यात्रा जारी है. चार धाम विशेष अधिकारी डॉ प्रजापति नौटियाल ने बताया कि बरसात के मौसम में आमतौर पर 

चारधाम यात्रा का प्लान थोड़ा सोच-समझकर बनाते हैं. यही वजह है कि इस समय यात्रियों की संख्या पहले के मुकाबले कम दिखाई दे रही है. इसके बावजूद जो श्रद्धालु यात्रा पर निकल रहे हैं, वे व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहे हैं. भीड़ कम होने का एक फायदा यह भी है कि धामों में दर्शन आसानी से हो रहे हैं।
मानसून की लगातार बारिश का असर उत्तराखंड की चारधाम यात्रा पर भी दिखाई दे रहा है. बारिश के कारण कई जगह सड़कें खराब हो रही हैं, तो कहीं मलबा और भूस्खलन यात्रियों के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि इन हालातों के बीच भी चारधाम यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। यात्रियों की संख्या जरूर कम है, लेकिन श्रद्धालु लगातार धामों की ओर पहुंच रहे हैं।




मंदिरों और आसपास के इलाकों में फिलहाल शांत माहौल।
लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान चार धाम विशेष अधिकारी डॉ प्रजापति नौटियाल ने बताया कि बरसात के मौसम में आमतौर पर लोग चारधाम यात्रा का प्लान थोड़ा सोच-समझकर बनाते हैं. यही वजह है कि इस समय यात्रियों की संख्या पहले के मुकाबले कम दिखाई दे रही है। इसके बावजूद जो श्रद्धालु यात्रा पर निकल रहे हैं, वे व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। भीड़ कम होने का एक फायदा यह भी है कि धामों में दर्शन आसानी से हो रहे हैं। मंदिरों और आसपास के इलाकों में फिलहाल शांत माहौल है और श्रद्धालुओं को बिना ज्यादा भीड़ के दर्शन का मौका मिल रहा है।
बारिश में मलबा अचानक आने का खतरा
बारिश के दौरान सबसे बड़ी परेशानी सड़क पर अचानक मलबा आने और भूस्खलन की वजह से होती है। पहाड़ी इलाकों में मौसम कुछ देर के लिए बिगड़ने पर भी सड़क पर पत्थर और मिट्टी आ सकती है। कहीं-कहीं पानी का बहाव भी सड़क पर बढ़ जाता है। हालांकि प्रशासन और संबंधित विभाग ऐसी जगहों पर रास्ता साफ करने का काम तेजी से करते हैं। मौसम खुलने के बाद कई मार्गों को दोबारा आवाजाही के लिए ठीक कर दिया जाता है. इसी वजह से यात्रा को मौसम के हिसाब से आगे बढ़ाया जा रहा है।

चारधाम में खास सावधानी की जरूरत यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के यात्रियों को है। इन दोनों धामों तक पहुंचने के रास्ते में पैदल यात्रा भी करनी पड़ती है. बरसात में पैदल रास्तों पर फिसलन, कीचड़, पत्थर गिरने और पानी बढ़ने जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं. ऐसे में यहां यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को मौसम को हल्के में नहीं लेना चाहिए। बारिश के दौरान रास्ता ठीक दिखाई देने के बावजूद पहाड़ों पर हालात अचानक बदल सकते हैं।
मौसम और यात्रा की दी जा रही जानकारी
प्रशासन की ओर से यात्रियों को लगातार मौसम की जानकारी दी जा रही है. ऋषिकेश के चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में भी यात्रियों को एलईडी स्क्रीन के जरिए मौसम और यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम की स्थिति देखकर ही अपनी आगे की यात्रा तय करें. अगर मौसम विभाग की ओर से किसी तरह की चेतावनी जारी होती है या रास्ते में मौसम खराब रहता है, तो उस समय आगे बढ़ने से बचना बेहतर है।
बारिश के बीच यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि जल्दबाजी न करें। रास्ता खुला होने का मतलब यह नहीं कि हर मौसम में सफर सुरक्षित रहेगा। फिलहाल चारों धामों में यात्रा सुचारू रूप से चल रही है और मंदिरों में श्रद्धालुओं को दर्शन हो रहे हैं। यात्रियों की संख्या कम होने के कारण धामों में भीड़ भी कम है। लेकिन मानसून को देखते हुए यमुनोत्री और केदारनाथ के पैदल मार्गों पर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
