रिपोर्ट- शम्भू प्रसाद
केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत ने जगतोली में निर्माणाधीन मिनी स्टेडियम को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं, लाखों रुपये के खर्च पर संदेह और सरकार के दावों पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को पत्र भेजकर स्टेडियम का हैंडओवर होने से पहले स्वतंत्र थर्ड पार्टी तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

मनोज रावत ने बताया कि हाल ही में दशज्युला-क्यूडी-मलास क्षेत्र के आपदा प्रभावित गांवों के दौरे के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने उनका ध्यान निर्माणाधीन मिनी स्टेडियम की ओर आकर्षित किया। इसके बाद उन्होंने स्वयं स्थल का निरीक्षण किया।
पूर्व विधायक का कहना है कि मैदान का विस्तारीकरण और समतलीकरण उनके विधायक कार्यकाल में विधायक निधि से कराया गया था और वर्तमान में दिखाई देने वाला मैदान उसी समय तैयार किया गया था। उनका आरोप है कि वर्तमान निर्माण कार्य को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन जमीनी स्थिति उन दावों से मेल नहीं खाती।

उन्होंने बताया कि परियोजना की प्रारंभिक लागत लगभग एक करोड़ रुपये बताई गई थी। शिलान्यास के समय 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल मैदान, जिम, चेंजिंग रूम और अन्य आधुनिक खेल सुविधाओं का वादा किया गया था, जबकि अधिकांश सुविधाएं अब तक धरातल पर दिखाई नहीं देतीं।
मनोज रावत ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों के अनुसार मैदान में वास्तविक खुदाई बहुत कम हुई, जबकि अभिलेखों में लगभग 40 लाख रुपये की मिट्टी खुदाई दर्शाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्य के दौरान किसी इंजीनियर की नियमित निगरानी स्थानीय लोगों को दिखाई नहीं दी।
उन्होंने बताया कि जानकारी के अनुसार निर्माण कार्य भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है। इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब उत्तराखंड में लोक निर्माण विभाग (PWD), आरईएस सहित कई सरकारी निर्माण एजेंसियां उपलब्ध हैं, तो बाहरी एजेंसी को कार्य देने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

पूर्व विधायक ने आशंका जताई कि निर्माण एजेंसी कार्य पूर्ण दर्शाकर जल्द ही स्टेडियम का हैंडओवर करने की तैयारी में है। उन्होंने मांग की कि हैंडओवर से पहले किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्था से तकनीकी निरीक्षण कराया जाए, ताकि निर्माण की गुणवत्ता और खर्च की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को पत्र भेज दिया गया है। साथ ही कहा कि परियोजना की डीपीआर और थर्ड पार्टी निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही पूरे मामले पर आगे विस्तृत टिप्पणी की जाएगी।
