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रिपोर्ट- शम्भू प्रसाद

रुद्रप्रयाग।
केदारघाटी एवं बद्री-केदार धाम की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने की दिशा में एक सराहनीय और ऐतिहासिक पहल सामने आई है। जिला पंचायत सदस्य त्रियुगीनारायण, रुद्रप्रयाग एवं प्रदेश मंत्री भाजपा युवा मोर्चा अमित कुमार मैखण्डी ने आज बद्री-केदार मंदिर समिति के माननीय अध्यक्ष से शिष्टाचार भेंट कर पारंपरिक ढोल-दमाऊ वादकों के स्थायी मानदेय को लेकर एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा।

इस ज्ञापन में वर्षों से केदारनाथ धाम एवं बद्रीनाथ धाम की यात्राओं, धार्मिक अनुष्ठानों और मंदिर परंपराओं में अपनी सेवाएं दे रहे ढोल-दमाऊ वादकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की मांग प्रमुखता से रखी गई। ज्ञापन में आग्रह किया गया कि इन वादकों को संविदा या स्थानीय रोजगार से जोड़ते हुए स्थायी मानदेय प्रदान किया जाए, ताकि उनकी पीढ़ियों से चली आ रही कला और सेवा को सम्मानजनक भविष्य मिल सके।

ढोल-दमाऊ की गूंज केवल संगीत नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा की आत्मा है। बाबा केदार और भगवान बद्री विशाल की यात्राओं में यह स्वर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। ऐसे में इन कलाकारों का सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण न केवल आवश्यक, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है।

अध्यक्ष ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र और सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया, जिससे क्षेत्र के ढोल वादकों और उनके परिवारों में नई आशा जगी है।

इस पूरे प्रयास के लिए क्षेत्रवासियों ने अमित कुमार मैखण्डी की खुलकर प्रशंसा की है। लोगों का कहना है कि उन्होंने जमीनी स्तर से जुड़े सांस्कृतिक मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाकर यह सिद्ध किया है कि वे न केवल जनप्रतिनिधि हैं, बल्कि लोक परंपराओं के सच्चे संवाहक भी हैं। यह पहल निश्चित रूप से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक मजबूत और प्रेरणादायक कदम मानी जा रही है।