



रिपोर्ट- शम्भू प्रसाद
वर्ष 2026 की केदारनाथ यात्रा को लेकर गौरीकुंड–केदारनाथ पैदल मार्ग पर दुकान संचालन, स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार तथा पूर्व में प्रभावित दुकानदारों को मुआवजा दिलाए जाने की मांग को लेकर आज पूर्व प्रधान व केदारघाटी श्रद्धालु सेवा समिति अध्यक्ष के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में समिति पदाधिकारी, स्थानीय व्यापारी एवं क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि वर्ष 2026 के यात्राकाल में गौरीकुंड–केदारनाथ पैदल मार्ग पर पूर्व वर्षों की भांति दुकानदारों को उनके पुराने निर्धारित स्थानों पर ही दुकान संचालन की अनुमति दी जाए, वह भी न्यूनतम शुल्क पर, बिना लॉटरी और बिना टेंडर प्रक्रिया के ताकि वास्तविक स्थानीय लोगों को ही रोजगार मिल सके।
इस अवसर पर पूर्व प्रदेश सलाहकार प्रधान संगठन संदीप पुष्पवान ने कहा कि वर्ष 2025 की यात्रा कई कारणों से पूरी तरह प्रभावित रही। उन्होंने बताया कि यात्रा प्रारंभ में ऑपरेशन सिंदूर, गौरीकुंड–केदारनाथ पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों में फैली संक्रामक बीमारी, तथा धराली, थारली सहित राज्य के कई क्षेत्रों में बादल फटने की घटनाओं से यात्रा व्यवस्था चरमरा गई थी, जिससे स्थानीय दुकानदारों और मजदूरों को भारी नुकसान उठाना पड़ा उन्होंने कहा कि ऐसे हालातों के बाद भी प्रशासन द्वारा स्थानीय बेरोजगार दुकानदारों को कोई विशेष राहत नहीं दी गई, जिससे लोगों में गहरा आक्रोश है।
उन्होंने बताया कि 31 जुलाई 2024 की आपदा में प्रभावित 120 से अधिक दुकानदारों का सत्यापन होने के बावजूद आज तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। प्रभावित दुकानदारों में जिला प्रशासन व राज्य सरकार के प्रति भारी नाराजगी है और वे लगातार केवल अपने हक का मुआवजा मांग रहे हैं, न कि कोई अतिरिक्त सुविधा।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि आगामी यात्रा 2026 मे भीमबली–रामबाड़ा–लिनचोली–थारू कैंप–बेस कैंप होते हुए केदारनाथ तक पुराना पैदल मार्ग पूर्व की भांति ही संचालित किया जाए, ताकि स्थानीय दुकानदारों, घोड़ा-खच्चर संचालकों व मजदूरों को रोजगार मिलता रहे और यात्रा व्यवस्था भी सुचारू बनी रहे।



ज्ञापन में यह भी मांग रखी गई कि गौरीकुंड से लीनचोली वन क्षेत्र में संचालित दुकानों का शुल्क एक ही विभाग द्वारा लिया जाए, जिससे दुकानदारों को बार-बार अलग-अलग विभागों के चक्कर न काटने पड़ें और अनावश्यक उत्पीड़न से बचा जा सके।
स्थानीय दुकानदारों व व्यापारियों ने यह भी मांग रखी कि 2026 में केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से कम से कम एक माह पूर्व दुकानों को खोलने की अनुमति दी जाए, ताकि वे समय रहते अपनी तैयारी कर सकें और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा सकें।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट रूप से कहा कि दुकानों का आवंटन तहसील ऊखीमठ से ही किया जाए, जिससे स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिले और बाहरी लोगों को अनुचित लाभ न मिल सके।


इस दौरान जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि “प्रशासन स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी नहीं करेगा। सभी मांगों को शासन स्तर पर भेजते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
इस मौके पर केदारघाटी श्रद्धालु सेवा समिति के पदाधिकारी, पूर्व ग्राम प्रधान, स्थानीय व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में प्रभावित दुकानदार मौजूद रहे साथ ही सभी व्यापारियों व ग्रामीणों द्वारा एक स्वर में उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई करने की राज्य सरकार से मांग की गई ।
