



रिपोर्टर : नरेंद्र रावत
कर्णप्रयाग
6 घंटे के सर्जिकल प्रयास व स्वयं रक्तदान कर बचाए प्रसूता एवम् बच्चे के प्राण।
जब एक ओर पूरा उत्तराखंड 31 दिसंबर की रात जश्न में डूबा था वहीं दूसरी ओर एक डॉक्टर दंपती किसी प्रसूता के प्राणों को बचाने के लिए अपना सर्वस्व अनुभव दांव पर लगाकर अपना कर्तव्य बखूबी निभा रहे थे।।



जी हां यह घटना है बीते 31 दिसंबर 2025 की रात की और जिस डॉक्टर दंपती का हम नाम ले रहे हैं वो हैं सुदूरवर्ती कर्णप्रयाग नगर में (डॉक्टर राजीव शर्मा दंपति) भगवान के बाद यदि कोई मानवता का रूप है तो वह डॉक्टर ही माना जाता है 31 दिसंबर की रात राजकीय समुदायिक चिकित्सालय कर्णप्रयाग चमोली में एक प्रसूता का गर्भाशय फट गया था जिससे कि लगभग दो तीन लीटर खून अंदर पेट में ही भर गया ऐसी आपात स्थिति में उसका रात्रि में ही ऑपरेशन किया गया इस दौरान सीएचसी कर्णप्रयाग में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ उमा शर्मा एवम् डॉक्टर शर्मा द्वारा पूरे 6 घंटे का अथक सर्जिकल प्रयास किया गया रक्तस्राव अधिक होने पर डॉक्टर शर्मा ने स्वयं रात्रि में रक्तदान भी किया व पूरी रात डॉ शर्मा दंपति प्रसूता व उसके बच्चे के प्राण बचाने में लग गए एवम् दोनों के प्राण बचाए।


डॉक्टर शर्मा दंपती 1 जनवरी 2026 को ही ऑपरेशन थियेटर से बाहर निकल सके।आपको बता दें कि डॉक्टर राजीव शर्मा पूर्व में मुख्य चिकित्सा अधिकारी चमोली के पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने आपात स्थिति का यह अनोखा उदाहरण जो पेश किया है वह सराहनीय है नहीं तो पहाड़ों में मरीज अनेक चिकित्सालयों में मरीज को रेफर कर दिया जाता है और इलाज भी नहीं हो पाता है। लेकिन यह बड़े गर्व की बात है कि डॉक्टर शर्मा ने अपना संपूर्ण जीवन एक सर्जन के रूप में लगभग तीन दशकों से पूरे चमोली जनपद के लोगों की सेवा में समर्पित किया है वे सर्जन के साथ साथ अत्यंत सज्जन,विनम्र एवम् सुलझे हुए चिकित्साधिकारी है। वे वर्तमान समय में सेवानिवृत्त होने
के बाद भी अपने अनुभव का लाभ पूरे पहाड़ को दे रहे हैं।। धन्य हैं डॉक्टर शर्मा दंपती।।
